गंगटोक में सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस समारोह के समापन समारोह में प्रधानमंत्री के भाषण का मूल पाठ

भारत माता की जय। सिक्किम के राज्यपाल श्री ओम माथुर जी, यहां के लोकप्रिय, ऊर्जावान युवा और मेरे परम मित्र श्री प्रेम सिंह तमांग जी, संसद में मेरे साथी श्री दोरजी शेरिंग लेपचा जी, डॉ. इन्द्र हांग सुब्बा जी, श्री दिली राम थापा जी और सिक्किम के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों। समग्र सिक्किम वासी लाई स्वर्ण जयंती को धेरै धेरै बधाई तथा शुभकामना, नमस्ते, टाशी डिले! खाम-रि-मो! तपाईंहरू कॉस्तो हुनु-हुन्छ ? साथियों, मैं कल दोपहर बाद गंगटोक पहुंचा था, और यहां मेरे आने से पहले, मैं बंगाल चुनावों की गहमा-गहमी में जरा व्यस्त था। यहां आते ही एक नई अनुभूति, एक नया आनंद, चारों तरफ उत्सव का माहौल, मन खुशियों से भर गया। रात में हुई बारिश, फिर सुबह की ठंडक और ये खिली हुई धूप, सिक्किम के रंग ही निराले हैं। साथियों, पूरब का स्वर्ग सिक्किम, ऑर्किड्स का गार्डन सिक्किम, इसका अप्रतिम सौंदर्य, यहां की शांति, यहां का आध्यात्मिक आनंद, ये अनुभूति बड़े सौभाग्य से मिलती है। आज मैं यहां के ऑर्किड्स को भी देखने गया था। मेरे लिए जितना समय तय हुआ था, मैं ज्यादा ही समय वहां बिता रहा था। और मैं देशभर के टूरिस्टों को, प्रकृति प्रेमी टूरिस्टों को, अगर उन्होंने सिक्किम का ये ऑर्किड नहीं देखा है, तो कुछ भी नहीं देखा है। और मुझे विश्वास है कि इस बार टूरिस्ट, सिक्किम के टूरिज्म के सारे आंकड़े इस बार पार कर देंगे। ऑर्किड में मैंने देखा प्रकृति के वो रंग, उनका उल्लास, मेरा मन अभी भी उसी में डूबा हुआ है। साथियों, आज हमें सिक्किम की 50 वर्ष की यात्रा का उत्सव मनाने का अवसर मिला है। जब अवसर इतना ऐतिहासिक हो और इतने दिव्य माहौल में हो रहा हो, तो उसकी भव्यता कई गुना बढ़ जाती है। पालजोर का ये स्टेडियम आज उसी अद्भुत आभा से भरा हुआ है। यहां जो सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, कलाकारों की मुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां हुईं। सिक्किम के आप लोगों का जो उत्साह दिखा, सामने पहाड़ों और आसमान में प्रकृति की सुंदर छटा दिखी। ऐसा लग रहा था, जैसे प्रकृति और संस्कृति साथ मिलकर जीवंत हो उठी। वाकई ये स्मूर्तियां हमेशा मेरे दिल में बनी रहेगी। और मैं जो भी कोरियोग्राफी करने वाले लोग होंगे, जो भी गाने वाले लोग होंगे, सबको बधाई देता हूं। और आज का ये कार्यक्रम मैं चाहूंगा कि ये टीवी, मीडिया वाले, दूरदर्शन वाले देश को बार-बार दिखाएं। जब देश में राजनीतिक स्वार्थ के चलते भाषावाद, प्रांतवाद, ऊंच-नीच, देश में भेदभाव के लिए लगातार कोशिश हो रही है, आज सिक्किम ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के दर्शन करा दिए। उन्होंने इस छोटे से कार्यक्रम में पूरा हिंदुस्तान आंखों के सामने खड़ा कर दिया। और अभी भी जो उन्होंने बैठने की रचना की है, मुझे ऊपर से दिखता है, पूरा हिंदुस्तान है, और जो जिस प्रदेश का है, वैसे ही परिवेश है, उधर गुजरात तो गुजराती कपड़ों में लोग बैठे हैं। वाकई-वाकई आपने दिल जीत लिया है। ये मोदी का नहीं, पूरे हिंदुस्तान का दिल जीत लिया है आज। यही तो भारत भक्ति होती है, यही तो देशभक्ति होती है। नई पीढ़ी में इसी से देशभक्ति के भाव जगते हैं। बहुत-बहुत बधाई आप लोगों को।